बिलासपुर:- मनोहर टाकिज के पीछे सिदारा कम्पाउन्ड जूना बिलासपुर निवासी स्वर्गीय सौंतोमल सिदारा जी की धर्मपत्नी, समाज सेवी स्वर्गीय अमृतलाल सिदारा जी एवं हरीश, गुरमुख,सनमुख, लक्ष्मण की पूज्य माताजी, शीला देवी सिदारा जी का आज सुबह 7:00 स्वर्गवास हो गया ,जीवन मरण यह एक सत्य है जिसे कोई बदल नहीं सकता क्योंकि यह मृत्यु लोक है चाहे राजा हो चाहे रंक हो या साधु ,महात्मा जिसने जन्म लिया है उन सब को अपनी यात्रा पूरी करके वैकुंठ जाना पड़ता है


बिल्कुल कम लोग होते हैं पुण्यात्मा है जो वैकुंठ धाम पहुंच पाते हैं वैकुण्ठ धाम पहुंचना इतना आसान नहीं है उसके लिए अच्छे कर्म व धर्म के कार्य करने पड़ते हैं तभी वह पुनीत आत्मा वैकुंठ धाम पहुंचती है ऐसी ही एक पुनीत आत्मा स्वर्गीय शीला देवी जी की भी है और हमें ईश्वर पर अपार आस्था है अपने प्रभु पर अपने भगवान पर कि उनकी आत्मा वैकुंठ धाम पहुंची होगी और प्रभु के श्री चरणों में समा गई सिंध से लेकर हिंद तक उनकी यात्रा रही धर्म ,कर्म के कार्यों में हमेशा आगे रही उनके चेहरे पर कभी भी तकलीफ ,परेशानी नजर नहीं आई हमेशा मुस्कुराते हुई नजर आती थी जीव, जंतु, जानवरों को भी भोजन देती थी गरीबों की सहायता करती थी


स्वर्गीय ममतामयी मां कलावती दुसेजा जी की वह भाभी थी दोनों मातृ देवीयों के बीच परस्पर प्रेम, सद्भाव, सौहार्द हमेशा अंतिम समय तक निरंतर रहा जिंदा दिल वाली इंसान थी वह एक पवित्र पुनीत आत्मा थी दुनिया में तो इंसान करोड़ो हैं पर उनमें बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो जीते जी ऐसे पुनीत कार्य करके जाते हैं जो उनके जाने के बाद भी लोग उनका स्मरण करते हैं उनमें एक थी स्वर्गीय शीला देवी सिदारा जी उनकी अंतिम यात्रा उनके निवास स्थान मनोहर टांकिज से शाम 4:00 बजे निकल कर जूना बिलासपुर दयालबंद होते हुए मधुबन मुक्तिधाम में पहुंची जहां पर विधि विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया


और वह पंच तत्वों में विलीन हुई इस अंतिम संस्कार यात्रा में बड़ी संख्या में समाज के लोग , पंचायत के अध्यक्ष, पदाधिकारी जन शामिल हुए अपने पीछे भरापूरा परिवार छोड़ गई है ,प्रभु से हम प्रार्थना करते हैं कि उनकी आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान देकर उन्हें शांति प्रदान करें वह उनके परिवार वालों को यह दुख सहने की शक्ति दे हमर संगवारी परिवार भी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है.