विजय की ✒कलम
बिलासपुर:- जिस तरह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तानाशाही कर रहे हैं विश्व के छोटे और मध्यमवर्गीय, देश के ऊपर अपनी हिटलर शाही चला रहे हैं इसी तरह का रूप हमें बिलासपुर में भी व्यापार विहार मर्चेंट एसोसिएशन में देखने को मिल रहा है संरक्षकों व पूर्व अध्यक्ष के द्वारा?
13 जनवरी के अंक में हमर संगवारी अखबार में हमने पहले ही इस बात की आशंका व्यक्त की थी और हमने लिखा भी था की 8 तारीख के संगठन के आम बैठक में पूर्व अध्यक्ष एवं पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत के वर्तमान अध्यक्ष ने खेला कर दिया? हमर संगवारी में दी गई जानकारी 100% सत्य साबित हुई जो हमने आशंका का व्यक्त की थी और जो हमने पॉइंट टू पॉइंट जानकारी दी थी वह लगभग 100% सही साबित हुई विगत दो माह पहले ही इस सारी घटनाक्रम का प्लान बनाया गया था? बस यह सब लोगों को दिखाने के लिए खाना पूर्ति के लिए आम बैठक बुलाई गई थी और चुनाव न करा कर संरक्षकों के द्वारा अध्यक्ष बनाए जाने का जो खेला खेला गया है यह पूर्व नियोजित था?
सूत्रों से हमें जानकारी पूर्व ही प्राप्त हो चुकी थी उसके बाद भी जब हमने पूर्व अध्यक्ष से चर्चा करने चाहि तो उन्होंने कुछ भी चर्चा करने से मना कर दिया और कहा कि संरक्षक के पास जाकर बात कीजिए वही सब जानकारी देंगे फिर भी हमने व्यापारियों का मन टटोलने के लिए वह सच जानने के लिए सर्वे करवाया विगत 2 दिन तक हमर संगवारी की टीम लगभग 250 दुकानों में जाकर फेस टू फेस व्यापारी से चर्चा की वह सर्वे किया सर्वे की रिपोर्ट भी हमने बाकायदा हमर संगवारी में यूट्यूब चैनल, पोर्टल व अखबार में प्रमुखता से स्थान देकर सबके सामने रखा की किस तरह सर्वे में 150 व्यापारी कहते हैं कि चुनाव होना चाहिए और लगभग 40 से 50 व्यापारी कहते हैं चुनाव नहीं होना चाहिए तो जनमत में भी चुनाव कराने का रिजल्ट आता है और इसमें पूर्व अध्यक्ष संरक्षक भी शामिल थे कि चुनाव होना चाहिए कह रहे थे छोटे से लेकर बड़े व्यापारी भी कह रहे थे पर इन सब को अनदेखा करते हुए अपने ही आदमी को कुर्सी में बैठाने के लिए जिस तरह इन्होंने लोकतंत्र की हत्या की वह बड़े ही शर्म की बात है? लोकतंत्र की दुहाई देने वाले सत्ता पर बैठे कुछ चंद धन्ना सेठों ने व्यापार विहार एशोसिएशन पर कब्जा करके रखा है?
जैसा कि हमें सूत्रों से जानकारी मिल रही है कि यह कब्जा सिर्फ कुर्सी के लिए नहीं बल्कि कुर्सी कि आड़ में बहुत कुछ ऐसा किया जा रहा है जो नहीं होना चाहिए और उसमें व्यापारियों का अहित हो रहा है?
हमें आशंका है कि इसमें करोड़ों का लेनदेन व घपला भी हो सकता है?
अगर नियम से और पारदर्शिता से इसकी तहकीकात की जाए तो सच डरावना होगा और आचार्य चकित होगा ?
हम चाहेंगे कि इसकी बाकायदा छानबीन की जाए जांच की जाए और सच सबके सामने लाया जाए अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो हमर संगवारी की टीम इस और कदम बढ़ाएगी व्यापारियों की हित में सच का पता लगाकर सबके सामने लाएगी हमने बार-बार कहा था कि भाई लोकतंत्र में अगर एक व्यक्ति भी कहता है चुनाव होना चाहिए तो चुनाव कराना चाहिए यहाँ पर तो पूरा जनमत चुनाव के पक्ष में आ रहा है उसके बाद भी आप उसकी अनदेखी कैसे कर सकते हैं ? और चुनाव कराने में हर जी क्या है अगर आपको अपने व्यक्ति को कुर्सी पर बैठाना है तो लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव लड़ा कर जितवा कर बठाइए किसने मना किया है , पर उन्हें पता था कि चुनाव होने पर उनकी हार निश्चित है और जो दूसरा व्यक्ति बैठेगा तो कहीं इनका धंधा चौपट ना हो जाए और काले धंधे बंद ना हो जाए?
और जो घपला है घोटाला है वह सबके सामने ना आ जाए इस डर से इन्होंने यह सब किया है?
अगर सच्चे होते दूध के धुले होते तो लोकतांत्रिक तरीके से ईमानदारी से चुनाव करवाते, चुनाव में भागीदारी करते और अपने व्यक्ति को चुनाव जीताकर कुर्सी पर बैठाते?
पर इन्होंने कुछ भी ऐसा नहीं किया, चोर दरवाजे के रास्ते जरिए कुर्सी में अपने व्यक्ति को बैठाया?
क्या इससे व्यापारियों का भला होगा?
क्या इससे समाज का भला होगा?
क्या इससे शहर का भला होगा?
क्या इससे लोकतंत्र मजबूत होगा?
क्या यह सब देखने के बाद भी शासन प्रशासन और समाज के वरिष्ठ जन ईमानदार लोग अब भी चुपी साधे बैठे रहेंगे,
यह सब तमाशा देखते रहेंगे लोकतंत्र की हत्या होते रहेगी?
सवाल बहुत है पर जवाब एक ही है चलेगी उसकी जिसके हाथ में है लाठी है और जो तानाशाह कहेगा?
जिस तरह समाज का बत्ताधर करके समाज को गर्त में डाल देने वाला तानाशाह अब व्यापारियों का भी वही हाल करने वाला है?
क्योंकि बहुत कुछ ऐसे सवाल का जवाब नहीं मिला है और बहुत कुछ ऐसे राज हैं जिसका खुलना अभी बाकी है?
धीरे-धीरे से एक-एक कर- कर के, हमर संगवारी, टिम,राज से पर्दा उठाएगी और सच आप सबके सामने लाएगी,
हमने पहले भी कहा है हमर संगवारी धर्म के साथ है न्याय के साथ है सच के साथ है समाज के साथ है व्यापारियों के साथ है लोकतंत्र के साथ है देश के साथ है और हम अपना काम इमानदारी से लोकतांत्रिक तरीके से करते रहेंगे,
ना डरे हैं ना डरेंगे सच लिखते रहे हैं सच लिखते रहेंगे आगे बड़े हैं आगे बढ़ते रहेंगे
समाज हित में देश हित में कलम चलती रहेगी
जय व्यापार जय छत्तीसगढ़
जय भारत मां
संपादकीय