ब्रह्माकुमारी बिलासपुर उसलापुर:
प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज, ओम शांति सरोवर ,उसलापुर में चल रहे “बालव्यक्तित्व विकास शिविर” के विशेष नौ वें सत्र में, बच्चों को अपने मन पर नियंत्रण रखने की कला सिखाई गई। सेवा केंद्र की निर्देशिका बीके छाया दीदी ने बच्चों को साइकिल चलाने का उदाहरण देते हुए बताया कि जब हम साइकिल चलाना सीखते हैं, तो शुरुआत में बैलेंस बनाने में अभ्यास करते है। गिरते भी हैं, लेकिन अभ्यास से संतुलन आ जाता है। उसी तरह हमारा शरीर साइकिल की तरह है, आत्मा चालक है, बुद्धि ब्रेक है और मन हैंडल है। इस पर सन्तुलन लाना मेडिटेशन से सीखते हैं। दिन भर हमारा मन कुछ ना कुछ सोचता रहता है, इसलिए हमें ब्रेक लगाने की ज़रूरत होती है। ज्यादा सोचने से मन थक जाता है। उसकी निशानी है गुस्सा आना , स्वभाव में चिड़चिड़ापन होने से मन डिस्टर्ब हो जाता हैं। जैसे शरीर को रेस्ट देने से शरीर वापस एनर्जेटिक हो जाता है वैसे ही ज्यादा सोचने से जब मन थक जाता है तो मेडिटेशन करने से मन को रेस्ट मिलता है तो वह भी एनर्जेटिक होता है। जब मन शक्तिशाली और शांत होता है। दीदी ने यह भी बताया कि हम जैसा सोचते हैं वैसी एनर्जी होती है लेकिन कभी-कभी ऐसा भी होता है कि हम पॉजिटिव सोचते हैं फिर भी एनर्जी नहीं आती, क्योंकि फीलिंग के साथ नहीं सोचते है। सकारात्मक सोच तभी प्रभावी होती है, जब हम उन विचारों को अनुभव करते है। इसके पश्चात, दीदी ने सभी बच्चों को अपने मन को सकारात्मक विचारों से भरने के लिए मन को स्थिर करने के लिए मेडिटेशन कराया।


और बच्चों को बताया कि इस प्रकार का नियमित मेडिटेशन मन को स्थिर और सकारात्मक बनाता है, जिससे बच्चे जीवन की किसी भी चुनौती को हिम्मत और खुशी के साथ स्वीकार कर सकते हैं और हर दिन सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ सकते हैं।
इसके बाद (श्री डांस एकेडमी की डांस टीचर ) श्रीमती शानू भट्ट के द्वारा बच्चों को कत्थक नृत्य सिखाया गया सभी बच्चों ने कत्थक के स्टेप सीखे, जिनमें उनके कदमों का संतुलन और मुद्रा को सही रखने की कला सीखी। दीदी ने बच्चों को ड्रॉइंग के माध्यम से रचनात्मक कला सिखाई। ड्राइंग पेंटिंग के माध्यम से स्वास्तिक का रहस्य भी समझाया।
ईश्वरी सेवा में
बी के छाया बहन
