सिन्धु संस्कार
नागपुर में सिंधी समाज को 75 साल बाद मालकाना हक का पट्टा मिल गया…
वहां की सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने आखिरकार यह मान लिया कि जिन लोगों ने देश विभाजन के बाद अपना सब कुछ छोड़कर भारत को अपना घर बनाया, उन्हें सम्मान और अधिकार मिलना चाहिए। लेकिन लगता है सागर, कटनी माधव नगर, जबलपुर के लोगों से कोई बहुत बड़ा गुनाह हो गया है…शायद यहां के लोगों की किस्मत में सिर्फ आश्वासन, फाइलें और तारीख पर तारीख ही लिखी गई है। 75 साल से लोग टैक्स दे रहे हैं, बिजली बिल भर रहे हैं, पानी का टैक्स भर रहे हैं, वोट दे रहे हैं, हर चुनाव में लोकतंत्र मजबूत कर रहे हैं…फिर भी अपने ही घर पर मालिकाना हक मांगना पड़ रहा है। अब समझ नहीं आता कि इसके लिए क्या करना पड़ेगा —क्या कोई बड़ा यज्ञ करवाना पड़ेगा?
हवन कराना पड़ेगा?
या फिर नेताओं और अधिकारियों की “कृपा दृष्टि” पाने के लिए कोई विशेष अनुष्ठान करना पड़ेगा?
नागपुर में अगर यह संभव है तो सागर में क्यों नहीं?, क्या यहां के नागरिक दूसरे दर्जे के हैं?
क्या यहां के परिवारों का संघर्ष और बलिदान कम है? अब समय आ गया है कि केवल भाषण और आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस निर्णय हो। हमारे समाज के कर्णधार माननीय सम्माननीय..श्री शंकर लालवानी जी.. और श्री भगवान दास सबनानी जी…….. हमारे सागर का भला करेंगे कृपा दृष्टि पड़ेगी
आखिर आप लोग समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं.. ऐसा हम लोग क्या करें जो आप लोगों की नजर हमारे सागर पर पड़े👆👆👆🙏🙏🙏 जय झूलेलाल
