- मोबाइल-कंप्यूटर के युग में भुजंगासन का अभ्यास जरूरी
- योग शिविर के चौथे दिन साधकों ने जाना पीठ दर्द और तनाव से मुक्ति का सरल उपाय
- अकलतरी ग्राम की बीके कविता व बीके देवहूति ने किया योग प्रदर्शन
बिलासपुर, राजकिशोर नगर। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून की तैयारियों के अंतर्गत ब्रह्माकुमारीज़ के शिव अनुराग भवन में आयोजित योग अभ्यास शिविर के चौथे दिन भुजंगासन के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला गया। ब्रह्माकुमारी गायत्री दीदी ने कहा कि भुजंगासन शरीर को सशक्त बनाने के साथ-साथ मन में आत्मविश्वास और सकारात्मकता का संचार करता है।

दीदी ने बताया कि वर्तमान समय में कंप्यूटर और मोबाइल के अत्यधिक उपयोग के कारण लोगों में गर्दन, कंधे और कमर की समस्याएं बढ़ रही हैं। भुजंगासन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने तथा पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होता है।
ग्राम अकलतरी की बीके देवहूति व बीके कविता ने मंच से भुजंगासन के साथ अन्य आसनों का प्रदर्शन किया।
बीके गायत्री दीदी ने बताया कि इस आसन के नियमित अभ्यास से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है तथा शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है। यह आसन मानसिक तनाव को कम करने और शरीर में नई ऊर्जा का संचार करने में भी लाभकारी माना जाता है।
भुजंगासन के पश्चात प्रतिभागियों ने प्राणायाम एवं राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास किया। कार्यक्रम के अंत में सभी ने स्वस्थ और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया।
