सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर रीवा, देवास और गुना के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को निजी संस्थाओं के जरिए संचालित करने का निर्णय लिया है। इन केंद्रों के लिए टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से निजी संस्थाओं का चयन होगा, जो डॉक्टरों की नियुक्ति से लेकर पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था संभालेंगी।
सरकार की योजना के तहत अस्पताल की बिल्डिंग और दवाइयों की व्यवस्था सरकार करेगी, जबकि संचालन निजी संस्थाएं करेंगी। इसके साथ ही निजी अस्पतालों और ट्रस्टों को सस्ती जमीन उपलब्ध कराने का भी प्रस्ताव रखा गया है, ताकि वे बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं विकसित कर सकें। इस फैसले को प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, जिस पर अब सियासी और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
