मन्दसौर
पदेन पटवारी शैलेन्द्र भदौरिया ने उफ़ तक आवाज़ नहीं उठाई जबकि उनके वहा रहते कितनी मशीनरी चली तालाब को छोटा करने मे सलग्न विडिओ से आकलन किया जा सकता है?, पटवारी ने क्यों उच्च अधिकारियो को अवगत नहीं करवाया?, मन्दसौर के जिला कलेक्टर श्री हीरालाल त्रिवेदी ने लामगरा तालाब की जमीन से लगी जमीन को अन्य ग्राम रानीखेड़ी, कटकिया, जमुनिया,भटेरवास, धमनार मे सेटलमेंट भूमी दे चुके है परन्तु अवैध रूपसे खुदाई करके तालाब का स्वरुप ही बदल दिया गया है। इस भूमी को जिला प्रशासन प्रति वर्ष लीज पर देकर राजस्व भी प्राप्त कर सकता है, परन्तु कोई संज्ञान नहीं लेने के कारण मन्दसौर की धरोहर और दलोदा तहसील के ग्राम लामगर का ये विशाल तालाब कुछ व्यक्तियों की निजी धरोहर बनता जा रहा है। मोके पर कई सर्वे ऑनलाइन शासकीय है परन्तु उनपर निजी विशाल भराव करके खेतो मे तब्दील कर लिया गया है। मोके पर 10 से 12 फ़ीट की ऊचाई वाली खाई लगा कर तालाब का 100 बीघा से अधिक रकबा छोटा कर दिया गया है और ये सब चुप चाप देखने वाले वहा के पटवारी तहसीलदार है जिन्हे सब कुछ अवगत है परन्तु मुँह बंद और आँखे मुंद रखी है। क्या जिला कलेक्टर श्रीमती अदिति गर्ग इस मामले को लेंगी संज्ञान मे?। ग्राम लामगरा निवासी ग्रामीणों को भी माननीय न्यायालय मे उनकी धरोहर और हजारों किसानों के जल स्त्रोत को बचाने के लिए आवाज़ उठानी चाहिए।
✍️ राजपाल सिंह परिहार ✍️
जिला ब्यूरोचीफ, डायरेक्टर राज़ न्यूज़ मन्दसौर, मध्यप्रदेश
9589411603,9109589960
मामला मन्दसौर जिले के जलसंसाधन विभाग और दलोदा तहसीलदार और पटवारी शैलेन्द्र भदौरिया से सम्बंधित ग्राम लामगरा के तालाब का है जिसका स्वरुप बीते दिनों सेकड़ो वाहनों को लगाकर तालाब मे भराव करके 10 से 12 फ़ीट की खाई लगा कर तालाब के रकबे को 150 बीघा से अधिक छोटा करने का है,जिसे ये बताया जा सकता है की ये भूमी जलसंसाधन विभाग की है वो जाने उनका पटवारी जाने। जब पूर्व मे जिला कलेक्टर श्री हीरालाल त्रिवेदी यहाँ की भूमी के बदले अन्य ग्रामीण क्षेत्रो मे सेटलमेंट भूमी दे चुके है तो फिर यहाँ का कब्ज़ा क्यों नहीं छोड़ा जा रहा है?। मोके पर जो तालाब किनारे सर्वे क्रमांक है वो शासकीय है और निजी सर्वे क्रमांक तालाब से कही दूर है परन्तु अवैध कब्जे के अलावा अभी हाल ही के दिनों मे तालाब से मिट्टी निकाल कर तालाब मे खाई बना कर तालाब का रकबा लगभग 150 बीघा कम किया गया और इसके विरुद्ध प्रशासनिक अमला या जनसंसाधन विभाग ने कोई आवाज़ नहीं उठाई। सूत्र बताते है की दलोदा तहसीलदार वंदना हरित और पटवारी शैलेन्द्र भदौरिया को इतने डम्फर पोकलेण्ड चलाकर तालाब का रकबा छोटा करने की पूर्व सुचना थी परन्तु आज तक कोई कार्यवाही नहीं होना राजस्व और जलसंसाधन विभाग पर कई प्रश्नचिन्ह लगाते है?
✍️राजपाल सिंह परिहार ✍️
