बिलासपुर। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय की लगभग पाँच एकड़ भूमि अग्रवाल समाज को आवंटित किए जाने की तैयारी को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव को विश्वविद्यालय की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि अंतिम निर्णय कार्यपरिषद (एक्जीक्यूटिव काउंसिल) द्वारा लिया जाना शेष है। सूत्रों के अनुसार विश्वविद्यालय प्रशासन ने अग्रवाल समाज को भूमि आवंटन संबंधी प्रस्ताव स्टैंडिंग कमेटी के समक्ष रखा था, जिस पर विचार-विमर्श के बाद इसे मंजूरी दे दी गई। प्रस्ताव अब कार्यपरिषद की बैठक में अंतिम अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के बीच विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। कई लोगों का कहना है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय की भूमि का उपयोग मुख्यतः शैक्षणिक, शोध, छात्र सुविधाओं एवं भविष्य के संस्थागत विस्तार के लिए किया जाना चाहिए। उनका मत है कि यदि किसी संस्था को भूमि दी जाती है तो उसके औचित्य, उद्देश्य और कानूनी प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाना आवश्यक है। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि यदि किसी सामाजिक संस्था को विश्वविद्यालय एवं समाजहित में उपयोगी गतिविधियों के लिए भूमि उपलब्ध कराई जाती है और इससे विश्वविद्यालय के नियमों का उल्लंघन नहीं होता, तो इसे सकारात्मक पहल के रूप में भी देखा जा सकता है।जानकारी के अनुसार अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन, छत्तीसगढ़ प्रांतीय इकाई द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में भवन निर्माण हेतु भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। इसी संबंध में प्रस्ताव स्टैंडिंग कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया गया था।फिलहाल इस विषय पर अंतिम निर्णय कार्यपरिषद की स्वीकृति के बाद ही प्रभावी होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। गौरतलब है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय की भूमि के उपयोग को लेकर यह मामला शैक्षणिक एवं सार्वजनिक महत्व का है। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा पारदर्शिता के साथ सभी तथ्यों को सार्वजनिक करना तथा निर्णय के आधार और नियमों को स्पष्ट करना आवश्यक माना जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रांति या विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।
कार्य परिषदमें रखा जाना चाहिए मामला
गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी परिसर में कुल 566 एकड़ जमीन है। जानकारों का कहना है कि इस तरह के मामले यूनिवर्सिटी की कार्य परिषद की बैठक में रखे जाते हैं न कि स्टेडिंग कमेटी में स्टेडिंग कमेटी विद्या परिषद की एक समिति है जो एकेडमिक मामलों के लिए है। यह भी सवाल उठ रहा है कि आखिर जमीन देने का निर्णय क्यों लिया गया और इससे किसको क्या लाभ मिलने वाला है..?
जमीन देना अभी तय नहीं हुआ
यूनिवर्सिटी के स्टेडिंग कमेटी की बैठक में अग्रवाल समाज को पांच एकड जमीन दिए जाने का सैद्धांतिक निर्णय लिया गया है। समाज की ओर से यूनिवर्सिटी से वाटिका और अग्रसेन स्मारक के लिए जमीन देने की मांग की गई थी। यूनिवर्सिटी का इंजीनियरिंग विभाग तय करेगा जमीन कहां देना है। जहां तक कुलपति के कार्यकाल वाली बात है तो उन एक्सटेंशन मिल चुका है।
– प्रो. मनीष श्रीवास्तव,
– मीडया प्रभारी, जीजीयू बिलासपुर
