(महंत तुलसीदास उदासी ने कहा—विवाह में दिखावा नहीं, प्रेम और सादगी जरूरी)
रायपुर। श्री दुर्गा माता मंदिर मढ़ी, लिली चौक, पुरानी बस्ती रायपुर में सतगुरु महंत अनंतपुरी गोस्वामी जी के सानिध्य में आयोजित शिव कथा अमृत के छठवें दिन भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के विवाह प्रसंग का सुंदर एवं भक्तिमय वर्णन किया गया। व्यास पीठ से महंत तुलसीदास उदासी जी ने कथा को आगे बढ़ाते हुए भगवान शिव की अद्भुत बारात का प्रसंग सुनाया।
महंत तुलसीदास उदासी जी ने बताया कि भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का शुभ समय आने पर सभी देवी-देवता प्रसन्न हुए और बारात की तैयारियां शुरू हुईं। जब भगवान शिव को दूल्हे के रूप में तैयार करने की बात आई तो उन्होंने पारंपरिक वस्त्रों और आभूषणों के बजाय वन्य जीवों की खाल को वस्त्र बनाया, रुद्राक्ष की माला धारण की, जटाओं में अर्धचंद्र लगाया और शरीर पर भस्म लगाई। हाथों में डमरू और त्रिशूल तथा वाहन के रूप में नंदी पर सवार होकर भगवान शिव बारात लेकर हिमालय की ओर निकले।
भगवान शिव की इस अनोखी बारात में ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र सहित सभी देवी-देवता, ऋषि-मुनि, संत-महात्मा, भूत-प्रेत और विभिन्न जीव-जंतु भी शामिल हुए। जब बारात हिमालय पहुंची तो माता पार्वती की सखियां बारात का अनोखा स्वरूप देखकर घबरा गईं और उन्होंने जाकर पार्वती के माता-पिता को पूरी जानकारी दी।
यह सुनकर हिमालय राज और माता पार्वती चिंतित हो गए। तभी नारद जी ने उन्हें समझाया कि पार्वती कोई साधारण कन्या नहीं बल्कि स्वयं जगदंबा का अवतार हैं। पूर्व जन्म की पूरी कथा बताने के बाद हिमालय राज और माता पार्वती के माता-पिता को वास्तविकता का ज्ञान हुआ और उन्होंने प्रसन्नतापूर्वक भगवान शिव की बारात का स्वागत किया।
विवाह में दिखावा नहीं, प्रेम और सादगी जरूरी
महंत तुलसीदास उदासी जी ने वर्तमान समय की शादियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज विवाह समारोहों में दिखावा और आडंबर बढ़ता जा रहा है। विवाह 16 संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार है, इसलिए इसे सादगी, प्रेम और पारिवारिक आनंद के साथ मनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया को खुश करने के चक्कर में अपनों को दुखी नहीं करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज लोग विवाह समारोहों में लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करते हैं, कई बार कर्ज तक लेते हैं, लेकिन इससे वैवाहिक जीवन में सुख और प्रेम की गारंटी नहीं मिलती। पहले के समय में विवाह सादगी से होते थे, घर-परिवार और पड़ोस में मंगल गीत गाए जाते थे और कई दिनों तक खुशियों का माहौल रहता था। आज दिखावे और अहंकार के कारण विवाह समारोह खर्चीले तो हो गए हैं, लेकिन रिश्तों में वह अपनापन और आनंद कम होता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ का विवाह हमें सिखाता है कि विवाह का आधार दिखावा नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और संस्कार होना चाहिए।
हास्य प्रसंग के माध्यम से किया आडंबर पर कटाक्ष
कथा के दौरान महंत तुलसीदास उदासी जी ने एक हास्य प्रसंग सुनाते हुए कहा कि एक गांव में बारात के दौरान मुखिया बनने की होड़ को लेकर लोगों में विवाद बढ़ गया। इससे परेशान एक व्यक्ति ने संकल्प लिया कि वह दोबारा कभी मुखिया नहीं बनेगा। जब गांव में कोई मुखिया बनने को तैयार नहीं हुआ तो एक व्यक्ति ने मजाक में गधे से भी पूछा कि क्या वह मुखिया बनेगा। गधे ने भी सिर हिलाकर मानो इंकार कर दिया।
इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने कहा कि आज लोग पद, प्रतिष्ठा और दिखावे के पीछे भाग रहे हैं। हमें यह समझना चाहिए कि पद से अधिक महत्वपूर्ण समाज और परिवार के प्रति सेवा एवं जिम्मेदारी है।
कथा स्थल पर पहुंची भगवान शिव की बारात
कथा के दौरान भगवान भोलेनाथ की बारात का विशेष आयोजन भी किया गया। आतिशबाजी और बैंड-बाजे के साथ भगवान शिव की बारात कथा स्थल पहुंची। बारात में भगवान शिव के साथ ब्रह्मा, विष्णु, नंदी तथा भूत-प्रेत के स्वरूप शामिल रहे। भक्तों ने फूलों की वर्षा कर बारात का स्वागत किया। बारात के कथा स्थल पहुंचते ही श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे और जमकर नृत्य किया।
इस दौरान भक्तों ने उत्साहपूर्वक “भोलेनाथ की शादी है, हम तो नाचेंगे, शंभूनाथ की शादी है, हम तो नाचेंगे” जैसे भक्ति गीतों पर आनंद लिया। सभी बारातियों का मिठाई से स्वागत किया गया।
बारिश के बीच भी कथा में डटे रहे श्रद्धालु
कथा के दौरान तेज बारिश भी हुई, लेकिन श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। बारिश के बीच भी बड़ी संख्या में भक्त पंडाल में डटे रहे और कथा श्रवण करते रहे। भक्तों ने कहा कि भगवान शिव की भक्ति के रंग में ऐसा डूबे हैं कि बारिश भी उनका उत्साह नहीं रोक सकी।
कार्यक्रम के अंत में भगवान शिव की आरती की गई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
सतगुरु महंत अनंतपुरी गोस्वामी जी ने कथा के छठवें दिन उपस्थित सभी भक्तों को शुभकामनाएं देते हुए आगामी 9 अगस्त रविवार को भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के शुभ विवाह के अवसर पर सभी श्रद्धालुओं को कथा स्थल पहुंचने का निमंत्रण दिया। उन्होंने भक्तों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का आनंद लेने और अपने जीवन को भक्ति से सार्थक बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का सोशल मीडिया के माध्यम से लाइव प्रसारण भी किया गया। आयोजन की कवरेज के लिए हमर संगवारी के संपादक विजय दुसेजा सहित मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
भवदीय
विजय दुसेजा
