मध्यप्रदेश से राष्ट्रीय स्तर तक एक तथ्य-आधारित अध्ययन एवं नीति विमर्श
1. सहरिया समुदाय की वर्तमान स्थिति
सहरिया मध्यप्रदेश के तीन विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) में शामिल है। मध्यप्रदेश सरकार की PM-JANMAN संबंधी योजना में भी बैगा, भारिया और सहरिया—इन तीनों PVTG समुदायों को लक्षित किया गया है।
सहरिया समुदाय की सबसे अधिक महत्वपूर्ण उपस्थिति ग्वालियर-चंबल और उससे जुड़े क्षेत्रों में है। भारत की 2011 जनगणना में सहरिया/सहरिया/सेहरिया आदि नामों को अनुसूचित जनजाति की जिला-वार तालिकाओं में दर्ज किया गया है।
2026 में PM-JANMAN/अन्य जनजातीय कार्यक्रमों के लिए उपलब्ध habitation-level आंकड़ों के अनुसार ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के प्रमुख जिलों में PVTG आबादी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मौजूद है। उपलब्ध 2026 के संकलित आंकड़ों में:
जिला| PVTG आबादी| PVTG परिवार| PVTG बस्तियां
शिवपुरी| 2,75,819| 72,547| 641
श्योपुर| 1,79,213| 45,175| 224
अशोकनगर| 1,32,441| 31,923| 393
ग्वालियर| 73,827| 15,436| 158
गुना| 71,762| 22,330| 355
दतिया| 10,992| 2,817| 76
मुरैना| 16,130| 3,785| 37
भिंड| 327| 59| 3
इन आठ जिलों को मिलाकर उपलब्ध संकलन में लगभग 7.61 लाख PVTG आबादी, 1.94 लाख परिवार और 1,887 PVTG गांव/बस्तियां दिखाई देती हैं। यह तालिका PVTG-स्तर का उपलब्ध 2026 संकलन है; इसे सीधे केवल सहरिया की आबादी नहीं कहा जाना चाहिए, क्योंकि इसमें जिले के अन्य PVTG भी शामिल हो सकते हैं। इसलिए अगला जरूरी कदम सहरिया-विशिष्ट जिला/ग्राम डेटा अलग करना है।
2. 2011 की जनगणना बनाम 2026 की स्थिति
यहां एक महत्वपूर्ण शोध-सावधानी जरूरी है।
भारत की अंतिम पूर्ण जनगणना 2011 में हुई थी। Census India की आधिकारिक तालिका में मध्यप्रदेश के सभी जिलों के लिए सहरिया सहित जनजाति-वार आंकड़े उपलब्ध हैं।
दूसरी ओर, PM-JANMAN के अंतर्गत केंद्र सरकार ने 2026 में PVTG परिवारों और बस्तियों की habitation-level पहचान के लिए PM Gati Shakti आधारित डेटा संग्रह कराया है। केंद्र सरकार ने जून 2026 तक इसी प्रक्रिया के आधार पर PVTG गांव, बस्तियां और आबादी के आंकड़े तैयार करने की जानकारी संसद में दी है।
इसलिए 23 सितंबर की बैठक में मांग होनी चाहिए कि मध्यप्रदेश सरकार सहरिया समुदाय की 2026 की जिला-वार, ग्राम-वार और परिवार-वार अद्यतन स्थिति सार्वजनिक करे।
3. सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न—जमीन किसके नाम है?
सहरिया समुदाय के लिए केवल यह जानना पर्याप्त नहीं है कि कितने परिवार हैं।
मुख्य प्रश्न होना चाहिए:
कितने सहरिया परिवार भूमिहीन हैं?
कितने परिवारों के पास कृषि भूमि है?
कितने परिवारों की भूमि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है?
कितनी भूमि महिलाओं के नाम है?
कितनी भूमि पति-पत्नी के संयुक्त नाम है?
कितने परिवारों के पास वास्तविक कब्जा है लेकिन कानूनी रिकॉर्ड नहीं है?
कितने परिवारों के भूमि विवाद चल रहे हैं?
इन सवालों का वर्तमान जिला-वार सार्वजनिक आंकड़ा उपलब्ध न होने के कारण सहरिया महिला भूमि-अधिकार का स्वतंत्र राज्यव्यापी सर्वेक्षण आवश्यक है।
4. वन अधिकार अधिनियम की स्थिति
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश में अब तक लगभग 24.18 लाख व्यक्तिगत वन अधिकार और 1.24 लाख सामुदायिक वन अधिकार निहित किए जाने का उल्लेख है। व्यक्तिगत अधिकारों के अंतर्गत लगभग 55.01 लाख एकड़ तथा सामुदायिक अधिकारों के अंतर्गत लगभग 182.91 लाख एकड़ क्षेत्र का उल्लेख मंत्रालय करता है।
लेकिन ये राष्ट्रीय आंकड़े हैं, सहरिया समुदाय के आंकड़े नहीं।
यही एक महत्वपूर्ण कमी है।
सहरिया समुदाय के लिए अलग से यह सार्वजनिक होना चाहिए कि—
– कितने FRA दावे प्राप्त हुए?
– कितने स्वीकार हुए?
– कितने अस्वीकृत हुए?
– कितने लंबित हैं?
– कितने व्यक्तिगत अधिकार मिले?
– कितने सामुदायिक अधिकार मिले?
– कितने अधिकार महिलाओं के संयुक्त नाम में हैं?
– कितने अधिकार अकेली महिला के नाम पर हैं?
– कितने परिवारों को अधिकार-पत्र मिलने के बाद वास्तविक कब्जा मिला?
5. PM-JANMAN से एक महत्वपूर्ण संकेत
मध्यप्रदेश के PM-JANMAN अभियान की प्रारंभिक सामग्री में 18 जिलों, 88 ब्लॉकों और 4,45,237 प्रतिभागियों वाले कैंपों का उल्लेख है। इन कैंपों में 214 Forest Rights Act pattas जारी किए जाने का आंकड़ा दर्ज है।
यह आंकड़ा बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे पूरे मध्यप्रदेश के सहरिया समुदाय के अंतिम FRA आंकड़े के रूप में नहीं समझना चाहिए।
इससे एक और सवाल पैदा होता है:
जब लाखों PVTG आबादी की पहचान की जा रही है, तो भूमि और वन अधिकारों के कितने दावे वास्तव में निपटाए गए हैं?
यही प्रश्न 23 सितंबर की बैठक में प्रशासन के सामने तथ्य के साथ रखा जाना चाहिए।
6. Habitat Rights की सबसे बड़ी स्थिति
PVTG के लिए Habitat Rights केवल घर या आवास का अधिकार नहीं है।
इसमें समुदाय के पारंपरिक पर्यावास, प्राकृतिक संसाधन, आजीविका, सांस्कृतिक परंपराओं और सामुदायिक जीवन से जुड़े अधिकारों को व्यापक रूप से देखा जाता है।
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय की 2023-24 वार्षिक रिपोर्ट में मध्यप्रदेश में:
– भारिया PVTG—12 गांवों में Habitat Rights
– बैगा PVTG—6 गांवों में Habitat Rights
दिए जाने का उल्लेख है।
लेकिन उसी सरकारी रिपोर्ट में सहरिया PVTG के Habitat Rights vesting का आंकड़ा नहीं दिया गया है।
इसे सहरिया समुदाय के लिए एक गंभीर डेटा और नीति प्रश्न के रूप में उठाया जाना चाहिए।
यह नहीं कहा जाना चाहिए कि “सहरिया को कहीं भी Habitat Rights नहीं मिला”, क्योंकि उपलब्ध स्रोत से ऐसा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
सही प्रश्न होगा:
“मध्यप्रदेश में सहरिया PVTG के कितने गांवों/पर्यावासों को Habitat Rights दिया गया है और जिला-वार स्थिति क्या है?”
7. महिलाओं के लिए स्थिति और अधिक महत्वपूर्ण क्यों है?
सहरिया महिला के लिए जमीन केवल संपत्ति नहीं है।
उसका संबंध—
घर + खेत + जंगल + पानी + ईंधन + चारा + लघु वनोपज + पशुपालन + खाद्य सुरक्षा + परिवार की आय
से है।
इसलिए अगर महिला को केवल घर मिल जाए लेकिन आसपास के जल, जंगल, चारा और आजीविका संसाधनों पर अधिकार या पहुंच न हो, तो उसके वास्तविक पर्यावास अधिकार का प्रश्न पूरी तरह हल नहीं होता।
इसी कारण महिला Habitat Rights को अलग से दस्तावेजीकृत किया जाना चाहिए।
8. सहरिया महिलाओं के लिए पांच प्रमुख अधिकार
आगामी अध्ययन में पांच अलग-अलग अधिकारों की जांच होनी चाहिए:
1. भूमि स्वामित्व अधिकार
महिला के नाम भूमि है या नहीं?
2. उत्तराधिकार अधिकार
पैतृक भूमि में बेटी/महिला को उसका कानूनी हिस्सा मिला या नहीं?
3. वन अधिकार
FRA के तहत महिला का नाम अधिकार-पत्र में है या नहीं?
4. सामुदायिक अधिकार
महिला को सामुदायिक वन संसाधनों और लघु वनोपज तक वास्तविक पहुंच है या नहीं?
5. Habitat Rights
सहरिया महिलाओं की पारंपरिक बस्ती, जलस्रोत, वन संसाधन, चराई, संग्रहण और सांस्कृतिक क्षेत्रों को सामुदायिक पर्यावास के रूप में मान्यता मिली या नहीं?
9. वर्तमान स्थिति का सार
वर्तमान उपलब्ध आंकड़ों से पांच बातें स्पष्ट होती हैं।
पहली: सहरिया मध्यप्रदेश के महत्वपूर्ण PVTG समुदायों में है और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र इसका प्रमुख भौगोलिक क्षेत्र है।
दूसरी: 2026 में PVTG बस्तियों और परिवारों का अधिक विस्तृत habitation-level डेटा तैयार किया जा रहा है।
तीसरी: FRA के तहत देश में बड़ी संख्या में व्यक्तिगत और सामुदायिक अधिकार मान्य हुए हैं, लेकिन सहरिया-विशिष्ट जिला-वार आंकड़े अलग से सामने लाना आवश्यक है।
चौथी: मध्यप्रदेश में कुछ PVTG के Habitat Rights मान्य होने का सरकारी रिकॉर्ड है, लेकिन उपलब्ध केंद्रीय रिपोर्ट में सहरिया के Habitat Rights की संख्या स्पष्ट नहीं है।
पांचवीं: PM-JANMAN के माध्यम से आवास, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, सड़क और आजीविका जैसे क्षेत्रों में काम हो रहा है, लेकिन भूमि और पर्यावास अधिकारों की स्थिति को उसी स्तर की प्राथमिकता और पारदर्शी डेटा के साथ सामने लाना आवश्यक है।
10. अब क्या करना चाहिए?
पहला कदम — सहरिया Land & Habitat Rights Survey
मध्यप्रदेश के सहरिया बहुल सभी जिलों में ग्राम-स्तर पर सर्वेक्षण हो।
प्रत्येक परिवार के लिए:
परिवार → भूमि → महिला का नाम → FRA → आवास → जल → जंगल → लघु वनोपज → सामुदायिक संसाधन → Habitat Rights
का रिकॉर्ड तैयार किया जाए।
दूसरा कदम — महिला-केंद्रित डेटा
हर जिले में अलग से यह दर्ज हो:
– महिला के नाम भूमि
– संयुक्त भूमि
– महिला-प्रधान परिवार
– विधवा/अकेली महिला परिवार
– भूमि विवाद
– FRA में महिला का नाम
– ग्राम सभा में महिला की भागीदारी
– Forest Rights Committee में महिला प्रतिनिधित्व
तीसरा कदम — जिला-वार Habitat Rights स्थिति
प्रशासन से लिखित रूप में मांगा जाए:
“सहरिया PVTG के कितने ग्राम/हैबिटेशन में Habitat Rights की प्रक्रिया शुरू हुई, कितने पूर्ण हुए और कितने लंबित हैं?”
इसका उत्तर जिला-वार और ग्राम-वार होना चाहिए।
चौथा कदम — ग्राम सभा आधारित Habitat Mapping
सहरिया बुजुर्गों और महिलाओं की भागीदारी से पारंपरिक क्षेत्र का नक्शा बनाया जाए।
नक्शे में शामिल हों:
बस्ती, खेत, जंगल, जलस्रोत, चराई क्षेत्र, लघु वनोपज क्षेत्र, धार्मिक/सांस्कृतिक स्थल, पारंपरिक मार्ग और सामुदायिक संसाधन।
पांचवां कदम — पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान स्थिति की तुलना
2011 Census + राजस्व रिकॉर्ड + FRA रिकॉर्ड + PM-JANMAN 2026 डेटा को मिलाकर Sahariya Rights Database बनाया जाए।
इससे पहली बार यह पता चल सकेगा कि जनसंख्या के मुकाबले भूमि और पर्यावास अधिकारों की वास्तविक स्थिति क्या है।
छठा कदम — महिलाओं के नाम अधिकार-पत्र
जहां कानून और पात्रता लागू हो, वहां यह सुनिश्चित किया जाए कि व्यक्तिगत वन अधिकारों में महिलाओं का अधिकार केवल कागज पर नहीं बल्कि रिकॉर्ड में भी स्पष्ट हो।
सातवां कदम — अस्वीकृत FRA दावों की समीक्षा
प्रत्येक जिले में अस्वीकृत दावों का स्वतंत्र सामाजिक ऑडिट हो।
प्रत्येक मामले में पूछा जाए:
दावा क्यों अस्वीकृत हुआ?
क्या साक्ष्य पर्याप्त था?
क्या ग्राम सभा की प्रक्रिया सही हुई?
क्या महिला की जानकारी/गवाही शामिल की गई?
आठवां कदम — सहरिया महिला अधिकार हेल्प डेस्क
प्रत्येक सहरिया बहुल ब्लॉक में भूमि, FRA, उत्तराधिकार और सरकारी योजनाओं के लिए महिला-केंद्रित सहायता केंद्र बनाया जा सकता है।
11. 23 सितंबर के कंसल्टेशन से निकलने वाला ठोस प्रस्ताव
बैठक केवल चर्चा तक सीमित न रहे।
एक “मध्यप्रदेश सहरिया महिला भूमि एवं पर्यावास अधिकार कार्ययोजना–2026” तैयार की जा सकती है।
इसमें पांच तत्काल मांगें रखी जा सकती हैं:
1. सहरिया PVTG की जिला-वार और ग्राम-वार अद्यतन जनसंख्या एवं परिवारों का डेटा सार्वजनिक किया जाए।
2. सहरिया समुदाय के व्यक्तिगत एवं सामुदायिक FRA दावों की जिला-वार स्थिति सार्वजनिक की जाए।
3. सहरिया PVTG के Habitat Rights की जिला-वार वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए।
4. महिलाओं के नाम भूमि एवं वनाधिकार की अलग-अलग स्थिति प्रकाशित की जाए।
5. सहरिया महिला भूमि एवं Habitat Rights पर राज्य स्तरीय टास्क फोर्स बनाकर समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए।
12. राष्ट्रीय स्तर पर अगला चरण
मध्यप्रदेश के इस अध्ययन को केवल राज्य तक सीमित न रखकर राष्ट्रीय स्तर पर “PVTG Women Land and Habitat Rights” अध्ययन के रूप में विकसित किया जा सकता है।
सहरिया के साथ बैगा, भारिया और अन्य PVTG समुदायों की तुलना करके यह अध्ययन किया जा सकता है कि:
कानून क्या कहता है → सरकार ने क्या किया → जमीन पर क्या स्थिति है → महिलाओं को कितना अधिकार मिला → Habitat Rights की वास्तविक स्थिति क्या है।
इससे नीति-निर्माताओं के सामने केवल मांग नहीं बल्कि डेटा, ग्राम-स्तरीय साक्ष्य और महिलाओं के वास्तविक अनुभव रखे जा सकेंगे।
निष्कर्ष
सहरिया समुदाय के सामने आज सबसे बड़ा प्रश्न केवल गरीबी या आवास का नहीं है। मूल प्रश्न है—
“जिस भूमि, जंगल और पर्यावास पर समुदाय पीढ़ियों से निर्भर रहा है, उस पर उसका कानूनी और वास्तविक अधिकार कितना है?”
और इसके साथ दूसरा प्रश्न होना चाहिए—
“उस अधिकार में सहरिया महिलाओं की हिस्सेदारी कितनी है?”
PM-JANMAN ने PVTG समुदायों की बुनियादी सुविधाओं को नीति के केंद्र में लाया है। अब अगला चरण भूमि, वन, सामुदायिक संसाधन और Habitat Rights को महिलाओं के अधिकार से जोड़कर देखने का होना चाहिए।
23 सितंबर 2026 के ग्वालियर कंसल्टेशन का संभावित केंद्रीय संदेश हो सकता है:
“सहरिया महिला का अधिकार केवल घर तक नहीं—भूमि, जंगल, जल, आजीविका और पर्यावास तक है।”
और इसे मध्यप्रदेश से उठाकर राष्ट्रीय PVTG महिला भूमि एवं पर्यावास अधिकार विमर्श से जोड़ा जाना चाहिए।
