छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष ने पत्रकारों की सुरक्षा और कार्यक्षेत्र में आने वाली परेशानियों पर जताई चिंता
बिलासपुर। पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर खबरों के कवरेज के दौरान पत्रकारों को कई तरह की परेशानियों और दबाव का सामना करना पड़ता है। कई बार पत्रकारों को समाचार कवरेज करने से रोकने, कैमरा या मोबाइल छीनने, फोटो-वीडियो डिलीट कराने, गाली-गलौज, धमकी तथा मारपीट जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है। इन परिस्थितियों में पत्रकारों को अपने कानूनी अधिकारों और उपलब्ध वैधानिक प्रावधानों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।
छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अमित गौतम ने पत्रकारों की कार्यक्षेत्र संबंधी समस्याओं पर चर्चा करते हुए कहा कि पत्रकार जनहित में समाचार संकलन का कार्य करते हैं। उन्हें कवरेज से रोकना न केवल उनके पेशेवर दायित्व में बाधा है, बल्कि ऐसी परिस्थितियों में कानून के तहत उपलब्ध संरक्षण और कार्रवाई के प्रावधानों को समझना भी आवश्यक है।
उन्होंने पत्रकार साथियों का ध्यान इस ओर भी आकर्षित किया कि 1 जुलाई 2024 से भारतीय दंड संहिता (IPC) के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) लागू है। ऐसे में पत्रकारों को पुरानी धाराओं के बजाय वर्तमान कानून में लागू प्रावधानों की जानकारी रखनी चाहिए।
कवरेज से रोकने या रास्ता बाधित करने पर कार्रवाई
यदि किसी पत्रकार को समाचार कवरेज करने से रोका जाता है, रास्ता बाधित किया जाता है अथवा उसके कार्य में जबरन हस्तक्षेप किया जाता है, तो परिस्थितियों के अनुसार BNS की धारा 126 (सदोष अवरोध) और धारा 127 (सदोष परिरोध) जैसे प्रावधान लागू हो सकते हैं।
कैमरा या अन्य उपकरण को नुकसान पहुंचाने पर भी कार्रवाई संभव
पत्रकार का कैमरा, मोबाइल, माइक अथवा अन्य उपकरण तोड़ने या नुकसान पहुंचाने की स्थिति में संपत्ति को नुकसान से संबंधित प्रावधान लागू हो सकते हैं। इसी तरह जबरन सामान छीनने अथवा अन्य आपराधिक कृत्य किए जाने पर मामले की परिस्थितियों के अनुसार संबंधित धाराओं में कार्रवाई हो सकती है।
धमकी, गाली-गलौज और मारपीट को नजरअंदाज न करें
कवरेज के दौरान पत्रकार को धमकाना, गाली-गलौज करना या मारपीट करना भी गंभीर मामला है। BNS की धारा 351 के तहत आपराधिक धमकी, धारा 352 के तहत जानबूझकर अपमान तथा चोट पहुंचाने की स्थिति में संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। गंभीर चोट की स्थिति में भी कानून में अलग प्रावधान मौजूद हैं।
पत्रकारों से अपील—घटना होने पर शिकायत में पूरी जानकारी दें
अमित गौतम ने पत्रकारों से अपील की कि यदि कवरेज के दौरान उनके साथ कोई आपराधिक घटना होती है तो वे घटना की पूरी जानकारी पुलिस शिकायत में दर्ज कराएं। घटना का समय, स्थान, आरोपी का नाम, मौजूद गवाह, फोटो-वीडियो, ऑडियो रिकॉर्डिंग और क्षतिग्रस्त उपकरण जैसे साक्ष्यों को सुरक्षित रखना भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि पत्रकारों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने के साथ-साथ कानून की सही और अद्यतन जानकारी भी रखनी चाहिए। किसी घटना में कौन-सी धारा लागू होगी, यह घटना के वास्तविक तथ्यों और जांच पर निर्भर करता है। इसलिए पत्रकारों को कानूनी प्रावधानों की जानकारी के साथ आवश्यकता पड़ने पर विधिक सलाह भी लेनी चाहिए।
छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन ने पत्रकारों से अपील की है कि इस महत्वपूर्ण जानकारी को अधिक से अधिक पत्रकार साथियों तक पहुंचाएं, ताकि समाचार संकलन के दौरान किसी भी प्रकार के दबाव, धमकी या अवरोध की स्थिति में पत्रकार अपने कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक रह सकें।
