
—कहा, जनता के पैसे से बने अस्पताल को PPP मॉडल पर सौंपना स्वीकार नहींबिलासपुर। कोनी स्थित लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 240 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशलिटी अस्पताल एवं 100 बिस्तरों वाले कैंसर अस्पताल को पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर संचालित किए जाने की प्रक्रिया का कांग्रेस ने कड़ा विरोध किया है। जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) एवं जिला कांग्रेस कमेटी (शहर) की संयुक्त प्रेसवार्ता में नेताओं ने आरोप लगाया कि जनता के टैक्स के पैसे, सरकारी जमीन और सरकारी संसाधनों से बने अस्पताल को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय मरीजों पर इलाज का भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा।प्रेसवार्ता में जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री, जिला कांग्रेस कमेटी (शहर) के अध्यक्ष सुबांशु मित्रा, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केसरवानी, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष धर्मजीत सिंह, कांग्रेस नेता ऋषि पांडे सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।महेंद्र गंगोत्री ने कहा कि अस्पताल का निर्माण कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आम जनता को कम खर्च में बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था। अस्पताल की जमीन सरकार की है, भवन सरकार ने बनाया है, मशीनें सरकार ने खरीदी हैं और पूरा ढांचा सरकारी धन से तैयार हुआ है। ऐसे में सरकार बताए कि निजी कंपनी को अस्पताल सौंपने की आवश्यकता आखिर क्यों पड़ रही है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा अक्टूबर 2024 में अस्पताल का उद्घाटन किए जाने और मुख्यमंत्री के निरीक्षण के बाद भी अस्पताल आज तक अपनी पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो सका है। विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल और तकनीकी कर्मचारियों के अधिकांश पद रिक्त हैं, जिसके कारण मरीजों को रायपुर, हैदराबाद और निजी अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केसरवानी ने दावा किया कि चिकित्सा शिक्षा विभाग के 10 जून 2026 के आधिकारिक दस्तावेजों में अस्पताल संचालन के लिए पीपीपी मॉडल, रिवाइज्ड लाइसेंस एग्रीमेंट और फाइनेंशियल मॉडलिंग एंड प्रोजेक्शन जैसी प्रक्रियाओं का स्पष्ट उल्लेख है। उन्होंने सरकार से इन दस्तावेजों को सार्वजनिक करने और पीपीपी मॉडल की शर्तें जनता के सामने रखने की मांग की।कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि अस्पताल निजी हाथों में गया तो सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली सस्ती चिकित्सा व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। वर्तमान में जहां सरकारी अस्पतालों में ओपीडी शुल्क 15 से 30 रुपये है, वहीं निजी अस्पतालों में यही शुल्क कई सौ रुपये है। एमआरआई, सीटी स्कैन और अन्य जांचों के लिए भी मरीजों को कई गुना अधिक राशि चुकानी पड़ती है। ऐसे में गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार सबसे अधिक प्रभावित होंगे।कांग्रेस ने कहा कि सरकार पहले अस्पताल को पूर्ण क्षमता से संचालित करे, सभी स्वीकृत डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल एवं तकनीकी कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति करे, आईसीयू, कैथ लैब, ऑक्सीजन प्लांट, इमरजेंसी और एम्बुलेंस जैसी सभी सुविधाएं शुरू करे। यदि सरकार पीपीपी मॉडल लागू करना चाहती है तो पहले यह लिखित गारंटी दे कि गरीब और सामान्य मरीजों का इलाज सरकारी दरों पर ही होगा और किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं बढ़ेगा।कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह केवल अस्पताल संचालन का विषय नहीं, बल्कि बिलासपुर संभाग के लाखों लोगों के स्वास्थ्य के अधिकार का प्रश्न है। जनता के पैसे से बने अस्पताल पर पहला अधिकार जनता का है। यदि सरकार अस्पताल के निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ती है तो कांग्रेस जनता के साथ मिलकर चरणबद्ध लोकतांत्रिक आंदोलन करेगी।
