
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के प्रथम ईसुरी पुरस्कार से सम्मानित एवं लोक साहित्यकार पं. अमृतलाल दुबे की जन्म जयंती के अवसर पर पं. अमृतलाल दुबे जयंती समारोह समिति द्वारा 1 अगस्त 2026, शनिवार को सायं 4:00 बजे से स्थानीय संस्कार भवन में जन्म जयंती एवं सम्मान समारोह 2026 का भव्य आयोजन किया जाएगा। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आशुतोष चतुर्वेदी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला बलरामपुर उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की गरिमामयी अध्यक्षता डॉ. विनय कुमार पाठक, पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग एवं कुलपति, थावे विद्यापीठ, गोपालगंज (बिहार) करेंगे। समारोह भूषण के रूप में न्यायमूर्ति चन्द्रभूषण वाजपेयी की उपस्थिति रहेगी। विशिष्ट अतिथियों में एस. एस. डी. बड़गैया (आई.एफ.एस.) डॉ. अभिलाषा बेहार सचिव छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग, डॉ. श्यामलाल निराला प्राचार्य जे. पी. वर्मा स्नातकोत्तर कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय तथा डॉ. संजय शर्मा डायरेक्टर डी एल एस कॉलेज शामिल होंगे। कार्यक्रम के अंतर्गत साहित्य, संगीत एवं संस्कृति का समृद्ध संगम देखने को मिलेगा। सुप्रसिद्ध लोकगायक मनोहर दास मानिकपुरी, राम निहोरा राजपूत एवं उनके साथियों द्वारा गीतों की संगीतमय विशेष प्रस्तुति दी जाएगी। साथ ही इसमें सुप्रसिद्ध चिकारा वादक झड़ी राम साहू जी ग्राम करगी कला जिला द्वारा चिकारा वादन एवं गायन की प्रस्तुति की जाएगी । वरिष्ठ साहित्यकार अंजनी कुमार तिवारी ‘सुधाकर’ की कृति “ऋतुपर्णा” का विमोचन भी किया जाएगा। समारोह में कवि सनत तिवारी एवं राजेश कुमार सोनार अपनी काव्यांजलि प्रस्तुत करेंगे। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले साहित्य, शिक्षा एवं कला जगत की विभूतियाँ जिनमें मुख्य रूप से डॉ. श्यामलाल निराला प्राचार्य, वरिष्ठ कवि सनत तिवारी, श्रीमती अनामिका शर्मा शशि रायपुर, लोक गायक मनोहर दास मानिकपुरी, राम निहोरा राजपूत एवं साथियों को सम्मानित किया जाएगा।कार्यक्रम में स्वागत भाषण डॉ. विवेक तिवारी द्वारा तथा आभार प्रदर्शन श्री महेंद्र कुमार दुबे द्वारा किया जाएगा। अंत में प्रतिष्ठित कवियों की सहभागिता से कवि गोष्ठी आयोजित होगी।पं. अमृतलाल दुबे जयंती समारोह समिति, बिलासपुर ने साहित्यकारों, शिक्षाविदों, कलाकारों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं नगरवासियों से समारोह में सपरिवार उपस्थित होकर आयोजन की गरिमा बढ़ाने की अपील की है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-साहित्यिक परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने तथा साहित्य साधकों के सम्मान का महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध होगा।
