
*रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारियों ने पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन का लिया संकल्प, बीके गायत्री बहन ने दिलाई शपथ**बिलासपुर।* रेलवे सुरक्षा बल के महानिरीक्षक कार्यालय द्वारा जीएम कार्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में अधिकारियों एवं डिजास्टर मैनेजमेंट ग्रुप के लिए *’आपदा प्रबंधन में मानसिक सशक्तिकरण एवं प्रभावी नेतृत्व’* तथा *’व्यस्त जीवन के लिए सहज राजयोग मेडिटेशन’* विषय पर विशेष प्रेरणादायी सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों एवं जवानों को मानसिक रूप से सशक्त बनाना, आपदा के समय प्रभावी नेतृत्व विकसित करना तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामाजिक उत्तरदायित्व का भाव जागृत करना था। माउंट आबू से आए मुख्य वक्ता *प्रो. बी.के. ओंकार चंद* ने कहा कि प्राकृतिक आपदाएँ और आकस्मिक परिस्थितियाँ कभी पूर्व सूचना देकर नहीं आतीं। ऐसे समय में तकनीकी दक्षता के साथ-साथ मानसिक दृढ़ता और आत्मिक स्थिरता भी उतनी ही आवश्यक होती है। उन्होंने कहा कि तनाव, भय और घबराहट निर्णय क्षमता को कमजोर कर देते हैं, जबकि राजयोग मेडिटेशन मन को शांत, एकाग्र और सकारात्मक बनाकर कठिन परिस्थितियों में भी सही निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करता है।उन्होंने अपने संबोधन में कहा, *”आज हर घर में सोफा सेट, टीवी सेट और आधुनिक सुविधाएँ हैं, लेकिन सबसे अधिक आवश्यकता ‘माइंड सेट’ की है। जिसका माइंड सेट है, उसकी लाइफ सेट है।”* उनके इस संदेश को उपस्थित अधिकारियों ने सराहा।प्रो. ओंकार चंद ने बताया कि वर्तमान समय में केवल **आईक्यू (IQ)** ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि **इमोशनल कोशेंट (EQ)** और **स्पिरिचुअल कोशेंट (SQ)** भी जीवन और नेतृत्व की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति स्वयं पर विजय प्राप्त कर लेता है, वही चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में दूसरों का मार्गदर्शन करने में सक्षम होता है।उन्होंने माउंट एवरेस्ट विजेता **अरुणिमा सिन्हा** का उदाहरण देते हुए कहा कि वास्तविक शक्ति शरीर की नहीं, बल्कि मन की होती है। एक पैर खो देने के बाद भी अरुणिमा ने विश्व की सर्वोच्च चोटी फतह कर यह सिद्ध किया कि यदि संकल्प दृढ़ हो तो कोई भी बाधा सफलता का मार्ग नहीं रोक सकती।कार्यक्रम के दूसरे सत्र में पर्यावरण संरक्षण पर विशेष चर्चा हुई। *रेलवे सुरक्षा बल के महानिरीक्षक मुनवर खुर्शीद** ने कहा कि एक जिम्मेदार नागरिक और सुरक्षा बल के सदस्य होने के नाते पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी हम सभी की है। उन्होंने अधिकारियों एवं जवानों से आह्वान किया कि वे अपने कर्तव्यों के साथ-साथ समाज में पर्यावरण संरक्षण और आपदा जागरूकता का संदेश भी पहुँचाएँ, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल सके।कार्यक्रम के समापन पर ब्रह्माकुमारी संस्थान की *बीके गायत्री बहन* ने बतलाया कि बिलासपुर में यह अभियान विशेष 11 स्थानों पर इको केयर का संदेश देगा। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं जवानों को सामूहिक संकल्प दिलाया। सभी ने मन, वचन और कर्म से प्रकृति की रक्षा करने, जल एवं बिजली की बचत करने, सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने, अधिक से अधिक वृक्ष लगाने एवं उनका संरक्षण करने, संकट के समय स्वयं शांत रहकर दूसरों का साहस बढ़ाने तथा सकारात्मक और मूल्यनिष्ठ जीवन जीने का संकल्प लिया।
