
बिलासपुर प्रेस क्लब के “हमर पहुना” कार्यक्रम में शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोजगार, स्वरोजगार और भविष्य की तकनीकों पर हुई सार्थक चर्चाबिलासपुर, 31 जुलाई। बिलासपुर प्रेस क्लब के लोकप्रिय एवं बहुप्रतीक्षित संवाद कार्यक्रम “हमर पहुना” में शुक्रवार को शिक्षाविद्, एआई विशेषज्ञ एवं प्रेरक वक्ता सीवी रमन विश्वविद्यालय के सचिव डॉ. अरविंद तिवारी ने शिरकत की। प्रेस क्लब सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के वरिष्ठ एवं युवा पत्रकारों ने शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोजगार, स्वरोजगार, डिजिटल क्रांति, मीडिया, स्टार्टअप, कौशल विकास और बदलते वैश्विक परिदृश्य से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर खुलकर चर्चा की।कार्यक्रम की शुरुआत प्रेस क्लब के अध्यक्ष अजीत मिश्रा एवं अन्य पदाधिकारियों द्वारा डॉ. अरविंद तिवारी का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत करने से हुई। इसके बाद पत्रकारों के साथ प्रश्नोत्तर का लंबा और ज्ञानवर्धक सत्र चला, जिसमें डॉ. तिवारी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि दुनिया तेजी से एआई आधारित तकनीकों की ओर बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में लगभग हर क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रभाव दिखाई देगा। ऐसे समय में युवाओं के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता नई तकनीकों को सीखने, स्वयं को लगातार अपडेट रखने और नवाचार की सोच विकसित करने की है।उन्होंने कहा कि एआई मानव का प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि उसका सहयोगी है। जो व्यक्ति तकनीक का सही उपयोग करना सीख लेगा, उसके लिए रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार और उद्यमिता के भी अनेक अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने युवाओं से केवल डिग्री तक सीमित न रहकर कौशल विकास, डिजिटल दक्षता, डेटा विश्लेषण, मशीन लर्निंग, साइबर सुरक्षा, कंटेंट क्रिएशन और नई तकनीकों का अध्ययन करने का आह्वान किया।डॉ. तिवारी ने कहा कि आज शिक्षा व्यवस्था में भी बड़े बदलाव की आवश्यकता है। विद्यार्थियों को रटने की बजाय समस्या समाधान, रचनात्मक सोच, नवाचार और व्यावहारिक ज्ञान पर आधारित शिक्षा दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि भविष्य उन्हीं युवाओं का होगा जो सीखने की प्रक्रिया को कभी नहीं रोकेंगे और समय के साथ स्वयं को बदलने के लिए तैयार रहेंगे।मीडिया में एआई की भूमिका पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता समाचार संग्रह, डेटा विश्लेषण, भाषा अनुवाद, वीडियो संपादन और तथ्य जांच जैसे कार्यों को अधिक तेज और प्रभावी बना सकती है, लेकिन पत्रकारिता की मूल आत्मा सत्य, संवेदनशीलता, निष्पक्षता और मानवीय दृष्टिकोण का स्थान कोई तकनीक नहीं ले सकती। उन्होंने कहा कि एआई पत्रकारों का सहायक उपकरण बन सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय और जिम्मेदारी हमेशा मानव की ही रहेगी।उन्होंने स्टार्टअप और स्वरोजगार के क्षेत्र में भी एआई की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि छोटे शहरों के युवाओं के पास भी आज वैश्विक स्तर पर काम करने के अवसर उपलब्ध हैं। इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कोई भी युवा अपने ज्ञान और कौशल के आधार पर देश-विदेश की कंपनियों के साथ कार्य कर सकता है।कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों ने शिक्षा नीति, रोजगार, तकनीकी परिवर्तन, सामाजिक प्रभाव, नैतिक चुनौतियों और एआई के भविष्य को लेकर अनेक सवाल पूछे, जिनका डॉ. तिवारी ने सरल, तथ्यपरक और प्रेरणादायक उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग मानव कल्याण, पारदर्शिता और समाज के विकास के लिए होना चाहिए।कार्यक्रम में बिलासपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष, सचिव, सह सचिव सहित बड़ी संख्या में पत्रकार, मीडिया प्रतिनिधि और आमंत्रित अतिथि उपस्थित रहे। सभी ने इस संवाद को अत्यंत उपयोगी, ज्ञानवर्धक और समय की आवश्यकता के अनुरूप बताया।कार्यक्रम के अंत में प्रेस क्लब की ओर से डॉ.अरविंद तिवारी को साल श्रीफल और स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। प्रेस क्लब अध्यक्ष अजीत मिश्रा के द्वारा आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।उपस्थित पत्रकारों ने कहा कि “हमर पहुना” जैसे कार्यक्रम समाज, मीडिया और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के बीच सार्थक संवाद का मजबूत मंच बन चुके हैं, जिससे नई सोच और सकारात्मक विचारों का आदान-प्रदान होता है।
