रायपुर। श्री दुर्गा माता मंदिर मढ़ी, लिली चौक, पुरानी बस्ती रायपुर में आयोजित शिव अमृत कथा के पांचवें दिन व्यासपीठ से प्रवचन देते हुए महंत तुलसीदास उदासी जी ने कहा कि आजकल समाज में कुछ तथाकथित संत, लोगों को भय दिखाकर अपनी ओर आकर्षित करते हैं, जबकि कुछ लोग लालच देकर अपने अनुयायी बनाते हैं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को किसी भी संत या संस्था के पीछे आंख मूंदकर नहीं चलना चाहिए, बल्कि अपने विवेक और बुद्धि का प्रयोग कर सत्य की पहचान करनी चाहिए।
कथा का विस्तार करते हुए महंत जी ने बताया कि किस प्रकार सप्तऋषियों ने माता पार्वती की बार-बार परीक्षा ली और माता पार्वती हर परीक्षा में सफल रहीं। इसके बाद भगवान भोलेनाथ ने स्वयं साधु का वेश धारण कर उनकी परीक्षा ली। जब माता पार्वती उस परीक्षा में भी सफल हुईं, तब भगवान शिव अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट हुए और कहा कि उनकी तपस्या सफल हो गई है तथा वे उन्हें पत्नी के रूप में रूप में स्वीकार करते हैं। यह प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
प्रवचन के दौरान महंत जी ने कहा कि जहां भीड़ हो, वहां सत्य हो यह आवश्यक नहीं है। आज कई लोग भीड़, तड़क-भड़क, भव्य आयोजन और तरह-तरह के व्यंजनों को देखकर आकर्षित हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि जैसे जादूगर और मदारी भी भीड़ इकट्ठा कर लेते हैं, लेकिन वहां केवल हाथ की सफाई और मनोरंजन होता है, उसी प्रकार कुछ लोग धर्म का चोला ओढ़कर उसे व्यवसाय बना रहे हैं। ऐसे लोगों से सावधान रहने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति को सच्चा गुरु मिल जाए और वह उस पर विश्वास न करे, उसका आध्यात्मिक कल्याण संभव नहीं है। महंत जी ने परोपकार का महत्व बताते हुए कहा कि “नदियां अपना जल नहीं पीतीं, वृक्ष अपना फल नहीं खाते और सच्चा संत कभी परोपकार नहीं छोड़ता। वही भगवान की कृपा का पात्र बनता है।” सच्चा संत सदैव समाज को ज्ञान, भक्ति और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
कथा के दौरान भक्ति से ओत-प्रोत भजनों की मनमोहक प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिन पर श्रद्धालु झूम उठे।
कार्यक्रम के अंत में महंत अनंतपुरी गोस्वामी जी ने सभी श्रद्धालुओं को कथा के पांचवें दिन की शुभकामनाएं देते हुए शनिवार को निकलने वाली भगवान भोलेनाथ की भव्य एवं दिव्य बारात में शामिल होने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की बारात में शामिल होने का अवसर अत्यंत दुर्लभ होता है, इसलिए सभी श्रद्धालु अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर पुण्य लाभ प्राप्त करें।
अंत में महाआरती के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया। कथा का सोशल मीडिया के माध्यम से लाइव प्रसारण भी किया गया, जिसे हजारों श्रद्धालुओं ने घर बैठे देखा। कार्यक्रम का मीडिया कवरेज हमर संगवारी के संपादक विजय दुसेजा द्वारा किया गया।
