रायपुर। सावन माह के पावन अवसर पर श्री दुर्गा माता मंदिर, मढ़ी लिली चौक, पुरानी बस्ती रायपुर में पहली बार सिंधी भाषा में आयोजित सात दिवसीय शिव कथा अमृत का भव्य समापन भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के शुभ विवाह के साथ हुआ। कथा का आयोजन महंत सतगुरु अनंतपुरी गोस्वामी जी के सानिध्य में किया गया, जबकि व्यासपीठ से गंगा धाम दरबार, संत नगर भोपाल के महंत साईं तुलसीदास उदासी जी ने सात दिनों तक अपनी अमृतवाणी से श्रद्धालुओं को शिव कथा का रसपान कराया।
3 अगस्त से प्रारंभ हुई कथा का शुभारंभ माता सती और भगवान भोलेनाथ की कथा से हुआ और 9 अगस्त को भगवान शिव एवं माता पार्वती के दिव्य विवाह प्रसंग के साथ कथा का समापन हुआ। सात दिनों तक मंदिर परिसर में भक्ति की गंगा बहती रही और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया।
हिमालय राज के यहां पहुंची भोलेनाथ की बारात
कथा के अंतिम दिन महंत तुलसीदास उदासी जी ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का सुंदर प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान भोलेनाथ की बारात हिमालय राज के यहां पहुंची। हिमालय राज और परिवार ने बारात का भव्य स्वागत एवं सत्कार किया। सप्तऋषियों की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ।
उन्होंने बताया कि माता पार्वती जब विवाह मंडप में पहुंचीं तो उनके दिव्य एवं सुंदर स्वरूप को देखकर भगवान भोलेनाथ भी मन ही मन प्रसन्न हुए। विवाह समारोह में देवी-देवताओं, ऋषि-मुनियों, गणों और विभिन्न जीव-जंतुओं तक की उपस्थिति का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह केवल एक दांपत्य संबंध नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि के कल्याण का प्रतीक है।
56 भोग से भी अधिक व्यंजनों से हुआ भव्य भंडारा
शिव-पार्वती विवाह उत्सव के अवसर पर विशाल पंडाल में भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। देवी-देवताओं, संत-महात्माओं, भाई साहब महाराज एवं श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई थी। विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन और प्रसाद की व्यवस्था ने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया।
इस अवसर पर पंडित कमल शर्मा द्वारा वैदिक मंत्रों के साथ भगवान भोलेनाथ एवं माता पार्वती का विवाह संपन्न कराया गया। विवाह के साक्षी बनने के लिए सर्व समाज के श्रद्धालु, संत-महात्मा एवं भाई साहब महाराज भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
‘ऐसा लग रहा है जैसे सतयुग में पहुंच गए हों’
भंडारे में प्रसाद ग्रहण करने पहुंचे संत-महात्माओं एवं भाई साहब महाराज ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि यहां का वातावरण देखकर ऐसा लग रहा है जैसे कलयुग में नहीं बल्कि सतयुग में आ गए हों। भगवान के विवाह उत्सव और भव्य आयोजन ने सभी को भाव-विभोर कर दिया।
महंत तुलसीदास उदासी जी ने भोजन को लेकर भी श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि भोजन को प्रसाद समझकर ग्रहण करना चाहिए। जितनी आवश्यकता हो उतना ही भोजन लें और अन्न को व्यर्थ न गवाए, उन्होंने कहा कि भोजन करते समय प्रभु का स्मरण करने से भोजन प्रसाद का रूप ले लेता है और मन को भी शांति मिलती है।
उन्होंने कहा कि जब भक्त अच्छे होते हैं तो भगवान कितने सुंदर होंगे, यह इस आयोजन में देखने को मिला। उन्होंने रायपुर में पहली बार सिंधी भाषा में कथा करने का अवसर मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की और आयोजन की सराहना करते हुए दोबारा भी ऐसे धार्मिक आयोजन में आने की इच्छा व्यक्त की।
महंत अनंतपुरी गोस्वामी ने दी शुभकामनाएं
महंत सतगुरु अनंतपुरी गोस्वामी जी ने भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के शुभ विवाह की सभी श्रद्धालुओं को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सात दिनों तक आयोजन को सफल बनाने में तन-मन से जुटे सभी सेवादारों की सराहना करते हुए कहा कि सेवा का पुण्य सेवक और उसके पूरे परिवार को प्राप्त होता है।
उन्होंने कहा कि सावन माह में इस प्रकार के धार्मिक आयोजन से सनातन धर्म और समाज को मजबूती मिलती है। भविष्य में भी ऐसे धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान बीच-बीच में भक्ति से ओतप्रोत भजनों की सुंदर प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिन पर श्रद्धालु झूम उठे।
सोशल मीडिया के माध्यम से हजारों लोगों ने देखा सीधा प्रसारण
कथा का सोशल मीडिया के माध्यम से लाइव प्रसारण भी किया गया, जिसे हजारों लोगों ने घर बैठे देखा और कथा का आनंद लिया। सात दिनों तक चले इस आयोजन में विभिन्न स्थानों से संत-महात्माओं एवं भाई साहब महाराज ने पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से संत साईं जलकुमार मसंद जी रायपुर, पंडित कोमल शर्मा गोंदिया, पंडित सोनू महाराज रायपुर, पंडित दक्ष शर्मा गोंदिया एवं भाई साहब गौरव उदासी, भाई साहब जमुना दास उदासी भाई साहब धनराज उदासी सहित अनेक संत-महात्मा उपस्थित रहे।
सात दिवसीय इस संपूर्ण कथा एवं धार्मिक आयोजन की कवरेज ‘हमर संगवारी’ के संपादक विजय दुसेजा द्वारा की गई।
