बिलासपुर। राजनीति में मंजिल तक पहुंचने के लिए सिर्फ टिकट और चुनाव जीतना ही काफी नहीं होता, असली परीक्षा तब होती है जब टिकट हाथ से निकल जाए और चुनाव का नतीजा उम्मीद के मुताबिक न आए। कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव का करीब 35 साल का राजनीतिक सफर कुछ ऐसी ही कहानी कहता है! जिसमें संघर्ष, इंतजार, जिम्मेदारियां, हार और फिर वापसी सब कुछ शामिल है….!
दरअसल, आज मंगलवार को बिलासपुर प्रेस क्लब के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘हमर पहुना’ में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं कोटा विधानसभा के विधायक अटल श्रीवास्तव ने अपने राजनीतिक जीवन के कई दिलचस्प पहलुओं को साझा किया। छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले अटल ने वरिष्ठ नेता स्व. बीआर यादव को अपना राजनीतिक गुरु बताते हुए कहा कि उन्होंने राजनीति को सत्ता नहीं, बल्कि समाजसेवा का माध्यम मानना सीखा।
*1998 से शुरू हुआ जिम्मेदारियों का सिलसिला*
विधायक अटल श्रीवास्तव ने बताया कि वर्ष 1998 में उन्हें शहर कांग्रेस कमेटी का महामंत्री बनाया गया। करीब 14 साल तक संगठन में काम करने के बाद 2014 में प्रदेश कांग्रेस कमेटी में महामंत्री की जिम्मेदारी मिली। वे अलग-अलग क्षेत्रों में संगठन का काम करते हुए उन्होंने जमीनी राजनीति का लंबा अनुभव हासिल किया। इस दौरान बलौदा बाज़ार, जीपीएम जैसे जिलो के अलावा प्रदेशभर के अलग अलग जिलों का दायित्व निभाया! लेकिन राजनीतिक सफर हमेशा आसान नहीं रहा। 2018 में विधानसभा चुनाव का टिकट नहीं मिला। उन्होंने बताया कि तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने फोन कर टिकट नहीं दिला पाने पर अफ़सोस जताया था। जिसे अटल ने इसे हार मानने के बजाय संघर्ष का एक पड़ाव माना। इसके बाद 2019 में कांग्रेस ने उन्हें बिलासपुर लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया। चुनाव परिणाम उनके पक्ष में नहीं आया, लेकिन राजनीतिक सफर फिर भी जारी रहा। बाद में उन्हें छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की जिम्मेदारी मिली और उन्होंने प्रदेश के पर्यटन विकास के लिए काम किया। सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके अटल ने बताया कि वे क्रिकेट में राज्य स्तर, बैडमिंटन में विश्वविद्यालय स्तर और तैराकी में भी राज्य स्तर पर खेल चुके हैं। परिवार और राजनीति के बीच संतुलन को चुनौतीपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि व्यस्तता के बावजूद परिवार के लिए समय निकालना जरूरी है। ‘हमर पहुना’ में अटल की पूरी कहानी का सार शायद उनकी इसी सोच में छिपा है! “राजनीति पद पाने का नहीं, बल्कि जनता के काम आने का माध्यम है।”
*पर्यटन में छत्तीसगढ़ की बड़ी संभावनाएं*
विधायक अटल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की असली ताकत जल, जंगल, जमीन और आदिवासी संस्कृति है। श्रीराम वन-पथगमन से पर्यटन को लेकर बस्तर, चित्रकोट, सरगुजा-मैनपाट, अचानकमार और कांगेर वैली तक को बेहतर पर्यटन सर्किट से जोड़ने की जरूरत है।
*सरकार पर सवाल, बिलासपुर के लिए मास्टर प्लान की मांग*
मौजूदा सरकार के ढाई साल के कार्यकाल पर उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। वनांचल क्षेत्रों में मलेरिया-डेंगू की रोकथाम, स्कूलों में शिक्षकों की कमी और विकास कार्यों की धीमी गति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि घोषणाओं के साथ उनके क्रियान्वयन की समय-सीमा भी तय होनी चाहिए। बिलासपुर के विकास पर उन्होंने दीर्घकालीन मास्टर प्लान की जरूरत बताई और कहा कि शहर के विकास के लिए राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर साझा रोडमैप बनना चाहिए।
इस अवसर पर बिलासपुर प्रेस क्लब कार्यकारणी अध्यक्ष अजित मिश्रा, उपाध्यक्ष विजय क्रांति तिवारी, सचिव संदीप करिहार, सहसचिव हरिकिशन गंगवानी, कार्यकारणी सदस्य कैलाश यादव ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत एवं साल-श्रीफल, स्मृति-चिन्ह देकर उनका सम्मान किया गया। अटल ने प्रेस क्लब को जनता से जुड़े मुद्दों पर संवाद का महत्वपूर्ण मंच बताते हुए बिलासपुर और छत्तीसगढ़ के विकास के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत पर जोर दिया। वहीँ पूर्व प्रेस क्लब अध्यक्ष तिलकराज सलूजा, पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र गहवई, वरिष्ट पत्रकार गणेश विश्वकर्मा, राजकुमार कलवानी, हेमंत कलवानी, राजेश दुआ, निर्मल माणिक, अशरफ मेमन सहित अन्य पत्रकार साथी बड़ी संख्या में उपस्थित रहें!
