– सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर। शहर को हरा-भरा बनाने के उद्देश्य से स्मार्ट सिटी योजना के तहत डिवाइडरों और सड़कों के किनारे लगाए गए कोनोकार्पस के पेड़ों को अब चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। इनके स्थान पर स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूल नीम, पीपल, बरगद, करंज, अमलतास सहित अन्य देशी प्रजातियों का पौधरोपण किया जाएगा।
करीब 4,500 विदेशी पौधों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की तैयारी, स्थानीय जलवायु के अनुकूल देशी प्रजातियों को मिलेगी प्राथमिकता
शहर में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत करीब 4,500 कोनोकार्पस के पौधे लगाए गए थे। इन पर लाखों रुपये खर्च किए गए। हालांकि, पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़े सवाल उठने के बाद अब प्रशासन ने इन विदेशी प्रजाति के पौधों को हटाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने विदेशी प्रजाति के कोनोकार्पस के रोपण, प्रचार-प्रसार और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया है। इसके बाद नगर निगम ने शहर में पहले से लगाए गए कोनोकार्पस को चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना तैयार की है। नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, कोनोकार्पस की जगह ऐसी देशी प्रजातियों का चयन किया जाएगा, जो स्थानीय पर्यावरण के अनुकूल हों और शहर की जैव-विविधता को बढ़ावा दें।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने उठाए सवाल
कोनोकार्पस को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञ लंबे समय से सवाल उठाते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रजाति के अत्यधिक विस्तार से स्थानीय वनस्पतियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा इसकी जड़ें आसपास के क्षेत्र में पानी और मिट्टी की उपलब्धता को भी प्रभावित कर सकती हैं। स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों को लेकर भी चिंताएं सामने आई हैं। इसके परागकण और अन्य जैविक प्रभाव संवेदनशील लोगों में एलर्जी, अस्थमा तथा श्वसन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों का वैज्ञानिक मूल्यांकन स्थानीय परिस्थितियों और शोध के आधार पर किया जाना आवश्यक है।
दो साल से पौधरोपण पर लगी है रोक
*नगर निगम के उपयुक्त खजांची कुंभकार के अनुसार,* कोनोकार्पस के पौधे हटाने के लिए शासन की ओर से कोई स्पष्ट निर्देश अभी नहीं आया है, लेकिन इस दिशा में पहले ही काम शुरू किया जा चुका है। निगम ने करीब दो साल से कोनोकार्पस का नया पौधरोपण बंद कर दिया है।उन्होंने बताया कि अब शहर में पर्यावरण की दृष्टि से उपयोगी और स्थानीय परिस्थितियों में बेहतर तरीके से विकसित होने वाली देशी प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
स्मार्ट सिटी में खर्च हुए करोड़ों, अब बदलेगी तस्वीर
स्मार्ट सिटी योजना के तहत शहर को हराभरा और आकर्षक बनाने के लिए डिवाइडरों एवं निगम सीमा के भीतर बड़ी संख्या में कोनोकार्पस लगाए गए थे। इन पौधों के रोपण पर करीब 7 करोड़ रुपये तक खर्च होने की जानकारी सामने आई है। अब इन पौधों को हटाकर देशी प्रजातियों का पौधरोपण करने से यह सवाल भी उठ रहा है कि पहले किए गए खर्च और अब होने वाले नए खर्च की जिम्मेदारी किसकी होगी। हालांकि, भविष्य की हरित योजना में स्थानीय प्रजातियों को प्राथमिकता देना पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नीम, पीपल और बरगद से सजेगा शहर
प्रशासन की नई दिशा में नीम, पीपल, बरगद, करंज और अमलतास जैसी देशी प्रजातियों को प्राथमिकता देने की तैयारी है। ये प्रजातियां स्थानीय वातावरण में बेहतर तरीके से विकसित होने के साथ-साथ पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं को आश्रय एवं भोजन उपलब्ध कराने में भी सहायक होती हैं।
अब चुनौती केवल पौधे लगाने की नहीं, उन्हें बचाने की भी
कोनोकार्पस हटाने के बाद देशी पौधे लगाने की योजना निश्चित रूप से स्वागतयोग्य है, लेकिन असली चुनौती पौधरोपण के बाद उनके संरक्षण और नियमित देखभाल की होगी। यदि देशी पौधों का चयन वैज्ञानिक आधार पर किया जाए, उन्हें पर्याप्त पानी, सुरक्षा और उचित स्थान मिले तथा नियमित निगरानी हो, तभी शहर की हरित योजना वास्तव में सफल हो सकेगी। स्मार्ट सिटी की पहचान केवल चौड़ी सड़कों और सुंदर डिवाइडरों से नहीं, बल्कि स्वस्थ पर्यावरण, स्थानीय जैव-विविधता और नागरिकों के लिए बेहतर जीवन-परिस्थितियों से भी होती है। ऐसे में विदेशी प्रजातियों के स्थान पर स्थानीय वृक्षों को बढ़ावा देने का निर्णय बिलासपुर की हरित तस्वीर को नई दिशा दे सकता है।
