बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर के वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार एवं समाजसेवी सुरेश सिंह बैस ‘शाश्वत’ को राष्ट्रीय सम्मान ‘छत्तीसगढ़ रत्न’ से सम्मानित किए जाने पर विभिन्न क्षेत्रों से लगातार शुभकामनाएं मिल रही हैं। इसी क्रम में आंध्र प्रदेश के गुंटूर निवासी अमृत पाप्पुला ने श्री बैस के निवास पहुंचकर उन्हें सम्मान की इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। शहर के ही उद्योगपति प्रभात गुप्ता ने भी मिल कर बधाइयां दी। इस अवसर पर अपनी चर्चित पुस्तक बोलती परछाइयां इन्हें भेंट कर श्री बैस ने अपनी शीघ्र ही प्रकाशित होनेवाले पुस्तक खामोश सरगोशियां के बारे में बताया कि यह पुस्तक काव्य लेखन के रूप में किया गया है और यह प्रकृति व लेखक के बीच का मौन संवाद है ,जो बहुत ही मार्मिक और मानवीय भावनाओं से ओत-प्रोत है। विदित हो कि रेडियंट टैलेंट बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा आयोजित समारोह में श्री सुरेश सिंह बैस ‘शाश्वत’ को राष्ट्रीय सम्मान ‘छत्तीसगढ़ रत्न’ से सम्मानित किया गया था। इस उपलब्धि पर समारोह के मुख्य संयोजक एवं बॉम्बे हाईकोर्ट के अधिवक्ता क्रांति महाजन ने भी अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। उन्होंने कहा कि सुरेश सिंह बैस ‘शाश्वत’ को यह सम्मान जनसरोकारों पर आधारित निर्भीक पत्रकारिता, निरंतर साहित्य-सृजन तथा सामाजिक चेतना के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया है। श्री बैस ने अपनी पत्रकारिता के माध्यम से सदैव आमजन से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। वहीं, साहित्य के जरिए उन्होंने मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक सरोकारों, प्रकृति एवं संस्कृति से जुड़े विषयों को प्रभावशाली स्वर दिया है। उन्होंने कहा कि श्री बैस की पहचान केवल एक पत्रकार और साहित्यकार तक सीमित नहीं है, बल्कि वे एक सक्रिय समाजसेवी के रूप में भी निरंतर समाजहित के कार्यों से जुड़े रहे हैं। उनका बहुआयामी व्यक्तित्व समाज में जागरूकता और सकारात्मक चेतना के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ‘छत्तीसगढ़ रत्न’ राष्ट्रीय सम्मान को श्री सुरेश सिंह बैस ‘शाश्वत’ की व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ बिलासपुर और छत्तीसगढ़ की साहित्यिक, पत्रकारिता एवं सामाजिक चेतना के राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान के रूप में भी देखा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि रेडियंट टैलेंट बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित भव्य समारोह के दौरान यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया था। इस सम्मान से बिलासपुर सहित छत्तीसगढ़ के साहित्यिक एवं पत्रकारिता जगत में हर्ष का वातावरण है।
